7/08/2009

"प्यार से मुमकिन है चमत्कार "


दस बर्षीय अजहर का माथा गोली से भिद गया था , लेकिन प्यार का चमत्कार कहिये की आज घटना के छः से ज्यादा बर्ष गुजरने के बाद वह अपने स्कूल तक लडखडाते क़दमों से जाने लगा है !उसका एक हाथ हमेशा के लिए मुड़ गया है , लेकिन उसका दिमाग ठीक काम करता है !वह अक्सर मुस्कुराता रहता है ! यह प्यार की ताकत का जीवंत उदाहरण है !दूसरा अजूबा यह है की उसकी माँ शकीला भी दिल से महज कुछ इंच नीचे छाती में गोली धँसने के बाद भी जीवित है !
          यह बर्ष २००२ में गोधरा काण्ड के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के करीब दो माह बाद की घटना है ! अहमदाबाद के बाहरी इलाके में रामोल गाँव के नजदीक हाईवे पर दो लाशें मिली थी ! यह मान लिया गया था की ये हत्याएं बदले की भावना से की गई थी !कुछ ही देर में जीपों में भरकर वर्दीधारी स्थानीय पुलिसकर्मी उस बस्ती में पहुँच गए जो लाशें मिलने वाली जगह के करीब थी !! यह  कामगारों की बस्ती मोहम्मद नगर थी ! उन्होंने बस्ती में घुसते से ही फायरिंग शुरू कर दी !!शकीला का घर बस्ती के मुहाने पर सड़क के नजदीक ही था !उस वक़्त दोपहर के खाने के लिए आंटा गूँथ रही शकीला को अचानक बाहर शोरगुल और गोलियों की दनदनाहट और अपने १० बर्षीय बेटे  के रोने की आवाज सुने दी!! वह आंटा सने हाथों से बहार निकली और अपने बेटे को अचेत पाया ! उसके सर के इर्द गिर्द काफी खून जमा था ! वह पुलिसकर्मियों पर चिल्लाई तो उसके सीने में भी गोली दाग दी गई !!वह भी अचेत होकर गिर पड़ी !पुलिस की बर्बरता देखिये की गोलियां चलती रही ..... जरीना को कंधे में.. नन्ही को हाथ में और रुबीना को छाती में गोली लगी!! बूढी जुलेखा ने गोली खाकर वहीँ दम तोड़ दिया !!थोडी हे देर में रापिड एक्शन फोर्स के जवान आ गए और वे भी यह मंजर देख कर दहल गए !! उन्होंने अजहर को तो मृत मान लिया लेकिन खून से लथपथ लाश और उसकी माँ को तुंरत अस्पताल पहुँचाया !! अजहर के पिता को खबर  लगी तो वह दौडा दौडा आया और जवानों से एंबुलेंस दने की गुजारिश की !अस्पताल के इमर्जेंसी वार्ड  में अजहर को मृत घोषित कर दिया !
                                                   यह सुनते की उसके पिता सर झुका कर बेंच पर बैठ गए !उसके हाथ स्टरेचेर पर थे पर अचानक उस तीव्र कम्पन महसूस हुआ  उसने देखा की अजहर दर्द से ऐंठ रहा है .. वह दौड़ के डॉक्टर के पास गया और बेटे को बचाने के लिए गुहार की पर डॉक्टर ने उसकी प्रार्थना को मौत से बिचलित पिता की गुहार मानकर अनसुना कर दिया !! इमाम उनके पैरों में गिर पड़ा !! आखिर वो अजहर के पास गए और उनके साथ  तीन युवा डॉक्टर भी थे !! वे भी मृत घोषित किये बच्चे में ऐंठन देखकर हैरान रह गए !!
                                  तीनो डॉक्टर हिन्दू थे !और वह ऐसा अँधा दौर था , जब कर्त्तव्य परायणता और मानवता के लिएय जाने जाने वाले डॉक्टर और वकील सरीखे पेशेवर लोगों पर भी धार्मिक आस्था हावी थी ! लेकिन इमाम तस्कीद करता है की तीनों युवा डॉक्टर ने पूर्वाग्रह नहीं, अनुकरणीय करुणा का परिचय दिया !अगले कई हफ्ते तक इमाम बेटे के सिराहने से हिला तक नहीं ,जब उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टर दिन रात एक किये थे !इसी बीच इमाम को चमत्कारिक ढंग से अपनी बीबी शकीला के बचने की खबर मिली !! अंततः वह दिन भी आ गया जब दोनों अस्पताल से घर आ गए !!
                                            इमाम की जिन्दगी का मकसद बच्चे की देखभाल था जिसके लिए उसने दिन रात फैक्ट्री में ओवर टाइम भी किया क्योंकि  मंहगी दवाओं के लिए पैसे की जरुरत थी !कई तकलीफों के बाद भी पिता ने हार नहीं मानी !!माता पिता के प्यार और सेवा की बदोलत ही बच्चा अपने पैरों पर खडा होने लगा !!
                          इमाम चाहता था की गुनेह्गारों को सजा मिले ! बजाय इसके थाने में शिकायत की गई कि अजहर और उसकी माँ बस्ती क एक मंदिर को तोड़ने वाली भीड़ में शामिल थे !! इस कथित हमले में बस्ती के ११ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया !!उन्हें जमानत नहीं मिली और ५ साल जेल में बिताने पड़े ! हालाँकिआरोप साबित नहीं होने पर अदालत ने अंततः सबको बरी कर दिया !   
                                       इमाम अपने बच्चे को पढाने के लिए संकल्पित है !! कभी कभी चलते चलते वह गिर भी पड़ता है ! उसे चीजें याद करने में भी दिक्कत होती है पर हालत बहुत सुधर गए हैं.!!
 अजहर कि मुस्कराहट और लडखडाते कदमो से उसके माता पिता के जखम भरे हैं !!

5/15/2009

Ummeed


wo laut aayega ek roz
isi ummeed mein maine
darwaaza ghar ka
khula hi rakha!!!
ek ek karke
sab rishte
usi darwaaze se hokar
guzar gaye..!!
===========
वो लौट आएगा एक रोज़
इसी उम्मीद में मैंने
दरवाजा घर का
खुला ही रखा !!!
एक एक करके
सब रिश्ते
उसी दरवाज़े से होकर
गुज़र गए..!!

"unknown"

4/14/2009

""सब कुछ तेरी ही खातिर ""


उसने कत्ल कर दिया मेरा दिल ..
पर उससे कोई शिकायत नहीं!!!

उसी का सामान था ..
सजाये या ख़ाक करे !!

हमने तो बहत पहले ही ..
उसकी चाहतों के बदले बेच दिया था !!

2/10/2009

pending

या रब ये क्या है , की जिस के लिए
दिन में भी सपने देखे थे,
और नींद से नाता खोया है .
छुप के मेरी इन बाँहों में
वो और किसी की यादों में,
कल बेहद टूट के रोया है.

1/24/2009

"Kya Khoya Kya Paya Jag Mein"


Kya Khoya Kya Paya Jag Mein
Milte aur bichadte pag mein

Mujhe kisi se nahi shikayat
Yadhyapi Chala gaya pag pag mein

Ek Dhristi beeti per daaale
Yaado ki potli tatole

Ek Dhristi beeti per daaale
Yaado ki potli tatole


Apne hi maan se Kuch bolein
Apne hi maan se Kuch bolein


Prithvi Lakho Varsh Purani
Jeevan Ek Annant Kahani

Prithvi Lakho Varsh Purani
Jeevan Ek Annant Kahani

Per Tan ki apni seemaye
Yadhyapi Sua sardon ki vani

Itna kabhi hai Anteem Dastak per
Khud Darwaza Khole

Itna kabhi hai Anteem Dastak per
Khud Darwaza Khole

Apne hi maan se Kuch bolein
Apne hi maan se Kuch bolein


Janam Maran ka Abhivat Phera
Jeevan Banjaro ka Dera
Janam Maran ka Abhivat Pheera
Jeevan Banjaro ka Dera

Aaj yahan Kal kahan kuch hai
Kaun Janta Kidhar Savera

Andiyara Aakash aseemit
Parno ke pankhon ko taule

Andiyara Aakash aseemit
Parno ke pankhon ko taule

Apne hi maan se Kuch bolein
Apne hi maan se Kuch bolein

"Atal Bihari Bajpai"